नई दिल्ली 11 जुलाई ( पीटीआई ) एनआईए की एक अदालत ने शुक्रवार को प्रतिबंधित पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया ( पीएफआई ) के कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय किए ।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने पी. एफ. आई. के 20 सदस्यों के साथ - साथ संगठन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि ( रोकथाम ) अधिनियम ( यू. ए. पी. ए. ) के तहत आरोप तय किए ।
अभियुक्तों में पी. एफ. आई. के अध्यक्ष ओ. एम. ए. सलाम के उपाध्यक्ष ई. एम. अब्दुल रहिमान के महासचिव अनीस अहमद के सचिव अफसार पाशा और संस्थापक अध्यक्ष ई. अबुबकर शामिल हैं । सभी अभियुक्तों ने अपना दोष स्वीकार नहीं किया ।
मुकदमा अब अभियोजन पक्ष द्वारा 29 जुलाई को अपना सबूत प्रस्तुत करने के साथ शुरू होगा ।
5 जून को अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था ।
अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर समग्र रूप से विचार करने से गंभीर संदेह पैदा होता है कि पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ( एन. ई. सी. ) के माध्यम से और उसकी ओर से काम करने वाले आरोपी एक ही साजिश को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हुए और कार्य किया - भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने और राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से वर्ष 2047 तक या उससे पहले भारत में शरिया कानून के तहत एक इस्लामी खलीफा स्थापित करने के लिए ।
यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एन. आई. ए. ) की अप्रैल 2022 की एफ. आई. आर. से उत्पन्न होता है, जिसके बाद एजेंसी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट और पी. एफ. आई सहित 26 अभियुक्तों के खिलाफ एक पूरक आरोप पत्र दायर किया । अदालत ने मार्च और अप्रैल 2023 में आरोप पत्रों का संज्ञान लिया ।
सितंबर 2022 में केंद्र ने पी. एफ. आई. और उसके कई सहयोगियों पर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाते हुए यूएपीए के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया ।
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