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एन. एच. आर. सी. ने एन. टी. पी. सी. मुज़फ़्फ़रपुर के सी. एम. डी. एस. एस. पी. को'एश डाइक लैगून'में तीन बच्चों के डूबने पर नोटिस भेजा

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एन. एच. आर. सी. ने एन. टी. पी. सी. मुज़फ़्फ़रपुर के सी. एम. डी. एस. एस. पी. को'एश डाइक लैगून'में तीन बच्चों के डूबने पर नोटिस भेजा

National Human Rights Commission {NHRC}

Editorial

नई दिल्ली - एनएचआरसी ने गुरुवार को कहा कि उसने राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम ( एन. टी. पी. सी. ) और बिहार में पुलिस अधिकारियों को उन रिपोर्टों पर नोटिस जारी किया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि मुजफ्फरपुर जिले के कांति क्षेत्र में सरकारी संगठन द्वारा निर्मित'एश डाइक लैगून'में तीन बच्चे डूब गए हैं । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पर अधिकारियों से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है । एन. एच. आर. सी. ने एक बयान में कहा कि उसने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है कि बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांति क्षेत्र में राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम द्वारा निर्मित'आश डाइक लैगून'में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई । इन तालाबों में एनटीपीसी द्वारा बड़ी मात्रा में कोयले की राख का भंडारण किया जाता है । कथित तौर पर इस क्षेत्र में कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था । आयोग ने पाया है कि समाचार रिपोर्ट की सामग्री यदि सही है तो मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर मुद्दों को उठाती है । इसलिए इसने एनटीपीसी दिल्ली के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इस पर विस्तृत रिपोर्ट देने की मांग की है । 12 जुलाई को की गई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कथित तौर पर इन तालाबों में ग्रामीणों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं किया गया है, जो बाजार में बेचने के लिए कोयले के अवशेष एकत्र करते हैं । एन. एच. आर. सी. ने एक अलग बयान में कहा कि उसने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है कि 14 जुलाई को उत्तर प्रदेश के नोएडा गौतम बुद्ध नगर जिले के सेक्टर - 93 में नोएडा प्राधिकरण द्वारा किए गए सफाई अभियान के दौरान एक सीवर लाइन में जहरीली गैसों से कथित रूप से 28 वर्षीय सफाई कर्मचारी की मौत हो गई थी । कथित तौर पर पीड़ित के परिवार ने आरोप लगाया है कि सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना सीवर में भेज दिया गया था । आयोग ने पाया है कि समाचार रिपोर्ट की सामग्री यदि सही है तो मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर मुद्दों को उठाती है । इसलिए इसने नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष और गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है । 15 जुलाई को की गई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित को पुलिस कर्मियों और दमकल कर्मियों ने बाहर निकाला और अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई ।

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