पठानमथिट्टा ( केरल ) - एक 20 वर्षीय हृदय रोगी ने केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को पत्र लिखकर पॉक्सो मामले के संबंध में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद हिरासत में यातना का आरोप लगाया है, जिसे बाद में झूठा पाया गया था ।
शुक्रवार को कूडल पुलिस ने एक 13 वर्षीय लड़की की शिकायत के आधार पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण ( पॉक्सो ) अधिनियम के तहत दो मामले दर्ज किए, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नाबालिगों सहित कई व्यक्तियों द्वारा उसका यौन उत्पीड़न किया गया था ।
बाद में लड़की की चिकित्सा जांच और मजिस्ट्रेट के सामने उसके बयान के बाद आरोप झूठे पाए गए ।
मंत्री को अपनी याचिका में युवक ने आरोप लगाया कि उन्हें 3 जुलाई को रात करीब 8 बजे बिना किसी नोटिस या स्पष्टीकरण के उनके घर से हिरासत में ले लिया गया था ।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक उप - निरीक्षक और अन्य पुलिस कर्मी जो वर्दी में नहीं थे, उन्हें जबरन एक निजी कार में ले गए ।
युवक ने कहा कि पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को सूचित किया कि उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी और वह न तो शिकायतकर्ता को जानता था और न ही उसके द्वारा लगाए गए आरोपों से उसका कोई संबंध था ।
इसके बावजूद उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में रहते हुए उन पर लाठी से हमला किया गया और मौखिक रूप से दुर्व्यवहार किया गया ।
उन्होंने हमले में कथित रूप से शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है ।
युवक ने लड़की के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 के तहत कार्रवाई की भी मांग की, जो गलत शिकायत करने या दुर्भावनापूर्ण इरादे से गलत जानकारी प्रदान करने के लिए सजा से संबंधित है ।
याचिका की प्रतियां केरल राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, राज्य पुलिस प्रमुख, जिला पुलिस प्रमुख, केरल राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष और राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को भी भेजी गई हैं ।
इस बीच सीपीआईएम की युवा शाखा डीवाईएफआई ने पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाते हुए कूडल पुलिस स्टेशन की ओर विरोध मार्च की घोषणा की ।
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