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भारत - अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों ने पंजाब में टोल प्लाजा पर किया विरोध प्रदर्शन

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भारत - अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों ने पंजाब में टोल प्लाजा पर किया विरोध प्रदर्शन

Chandigarh: Farmers from various unions arrive on motorcycles to take part in a protest rally against the proposed India-US trade agreement and other issues, in Chandigarh, Monday, July 13, 2026. (PTI Photo) (PTI07_13_2026_000292B)

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चंडीगढ़ 14 जुलाई ( पीटीआई ) संयुक्त किसान मोर्चा ( गैर - राजनीतिक ) ने पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति और प्रस्तावित भारत - अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को पूरे पंजाब में कई टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किए । एसकेएम ( गैर - राजनीतिक ) के राष्ट्रीय संयोजक और भारतीय किसान संघ ( एकता सिद्धुपुर ) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल के आह्वान का जवाब देते हुए किसान टोल प्लाजा पर एकत्र हुए और पंजाब सरकार और केंद्र दोनों के खिलाफ नारे लगाए । उनका विरोध प्रदर्शन सुबह 11 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक जारी रहा । प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी शुल्क के टोल प्लाजा के माध्यम से वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी । किसानों ने कहा कि कलझार लाधोवाल चाहर कुराली और दप्पर सहित 40 से अधिक टोल प्लाजा पर विरोध प्रदर्शन किए गए । किसान नेता जसविंदर सिंह ने मोहाली के डप्पर टोल प्लाजा में कहा कि वे भारत - अमेरिका व्यापार सौदे की भूमि पूलिंग नीति और भूमि बंधक बैंक में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे थे । उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हाल ही में संशोधित भूमि पूलिंग नीति के माध्यम से किसानों की भूमि को लूटना चाहती है । उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि प्रस्तावित भारत - अमेरिका व्यापार सौदा डेयरी किसानों सहित भारतीय किसानों के हितों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा । खरार टोल प्लाजा के एक अन्य किसान नेता ने कहा कि वे लैंड पूलिंग नीति और प्रस्तावित भारत - अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर थे । प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि भूमि पूलिंग नीति के तहत राज्य सरकार का इरादा उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करना और इसे कॉर्पोरेट घरानों को सौंपना है । उन्होंने इस नीति को वापस लेने की मांग की । प्रस्तावित भारत - अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करते हुए उन्होंने मांग की कि कृषि डेयरी और मुर्गी पालन क्षेत्रों को प्रस्तावित समझौते से बाहर रखा जाए और समझौते को रद्द करने का आह्वान किया, यह आरोप लगाते हुए कि इससे भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा । उन्होंने दोनों सरकारों से अपनी मांगों को पूरा करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि अगर इन्हें पूरा नहीं किया गया तो वे अपना आंदोलन तेज कर देंगे ।

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