प्रयागराज 9 जुलाई ( पीटीआई ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए एक दोषी को माफी देने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, लेकिन जिसे केवल पांच साल की सजा - दस महीने और 18 दिन की सजा काटने के बाद रिहा कर दिया गया था ।
न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की दो न्यायाधीशों की पीठ ने 3 जुलाई को पारित आदेश में उत्तर प्रदेश के प्रधान सचिव ( गृह ) से मानदंडों और उस आधार का खुलासा करते हुए एक व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है जिसके आधार पर ऐसी छूट दी गई थी ।
कानपुर नगर जिले के शैलेंद्र सिंह द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया गया ।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए उनके वकील ने कहा कि मुख्य अपराधी जय देव सिंह को भारतीय दंड संहिता ( आई. पी. सी. ) की धारा 148 के साथ पठित धारा 303 ( हत्या ) के तहत दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी ।
हालाँकि अपराध की गंभीरता के बावजूद उन्हें केवल पाँच साल - दस महीने और अठारह दिनों की सजा काटने के बाद माफी दी गई थी ।
इस दलील को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने कहा, " प्रथम दृष्टया यह एक परेशान करने वाली स्थिति प्रतीत होती है जिस तरह से एक गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा पाए व्यक्ति को केवल साढ़े पांच साल की सजा काटने के बाद माफी दी गई थी ।
गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी से जवाब मांगते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को दोषी जय देव सिंह को वर्तमान याचिका में सह - प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया । उसने यह भी आदेश दिया कि उसे तदनुसार नोटिस जारी किया जाए ।
उपरोक्त निर्देश पारित करने के बाद अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को चार सप्ताह के बाद सूचीबद्ध किया जाए ।
उत्तर प्रदेश राज्य और जेल और प्रशासनिक सुधार महानिदेशक को वर्तमान रिट याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है ।
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