नई दिल्ली 8 जुलाई ( पीटीआई ) यहां की एक अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में पुलिस गवाहों की उपस्थिति और मामले की संपत्ति को पेश करने में बार - बार देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके परिणामस्वरूप समय की बर्बादी हुई । अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने यह भी निर्देश दिया कि इस मुद्दे को पुलिस आयुक्त के संज्ञान में लाया जाए ताकि निचली अदालतों के समक्ष पुलिस साक्षियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके ।
7 जुलाई के एक आदेश में अदालत ने कहा कि यह देखा गया है कि पुलिस गवाह इस अदालत के समक्ष सुबह 10 बजे उपस्थित नहीं होते हैं और आमतौर पर वे सुबह 11 बजे पेश होते हैं जिसके परिणामस्वरूप इतना समय बर्बाद होता है । इस अदालत में अधिकांश मामले साक्ष्य के स्तर पर होते हैं और इसलिए साक्ष्य के लिए मामला आमतौर पर सुबह लगभग 10.05 बजे आता है । न्यायाधीश ने आगे कहा कि पिछली सुनवाई में पहले से ही इसी तरह की चिंता दर्ज होने के बावजूद देरी जारी रही थी ।
यह आदेश मामले को दो बार बुलाए जाने के बाद आया था, लेकिन अदालत को सूचित किया गया था कि मामले की संपत्ति पुलिस द्वारा पेश नहीं की गई थी । अदालत ने बाद में नोट किया कि विशेष प्रकोष्ठ का संबंधित अधिकारी तब तक केवल 10:30 बजे पेश हुआ था, जब तक कि एक अन्य मामले में गवाही शुरू हो चुकी थी । यह भी नोट किया गया कि उस मामले में जांच अधिकारी देर से पहुंच गया था ।
अदालत ने अपने 4 जुलाई के आदेश की एक प्रति संलग्न करने का निर्देश देते हुए कहा कि मामले को दिल्ली पुलिस आयुक्त के संज्ञान में लाया जाना चाहिए ताकि इस मुद्दे पर गौर किया जा सके और समय पर अदालत के समक्ष गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके ।
इस मामले को योग्य पुलिस आयुक्त के संज्ञान में लाया जाए ताकि इस मुद्दे पर गौर किया जा सके और समय पर अदालत के समक्ष गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके । 4 जुलाई 2026 के आदेश की प्रति भी इस आदेश के साथ संलग्न की जाए ।
अदालत उन कई लोगों के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिन पर राष्ट्रीय राजधानी के दयालपुर क्षेत्र में दंगों को अंजाम देने और दंगों का हिस्सा बनने का आरोप था ।
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