शिमलाः उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि वंदे मातरम ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया - साहस और आशा के साथ स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों को प्रेरित करना ।
वे वंदे मातरम की यात्रा पर स्थायी प्रदर्शनी और भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान ( आई. आई. ए. एस. शिमला ) द्वारा आयोजित'सरदार पटेल के दृष्टिकोणः एकीकरण और संघवाद'पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन को आभासी रूप से संबोधित कर रहे थे ।
सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पटेल ने न केवल क्षेत्रों को एकजुट किया, बल्कि भारतीयों के दिलों को भी एकजुट किया और एक राष्ट्र - एक संविधान और एक समान नियति की नींव रखी ।
उन्होंने यहां जारी एक बयान में कहा, " वंदे मातरम ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को एक पवित्र राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया - साहस और आशा के साथ स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों को प्रेरित किया ।
इस बात पर जोर देते हुए कि ईमानदारी - उत्कृष्टता और उद्देश्य की एकता के माध्यम से देशभक्ति को हर दिन प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए, उन्होंने नागरिकों से एक एकजुट आत्मविश्वास और समावेशी भारत के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करके वंदे मातरम और सरदार पटेल के स्थायी दृष्टिकोण के कालातीत संदेश को आगे बढ़ाने का आग्रह किया ।
इससे पहले उपराष्ट्रपति को सरदार पटेल के दृष्टिकोण पर एक सेमिनार का उद्घाटन करने के लिए शिमला पहुंचना था, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया ।
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