लातुर ( महाराष्ट्र ) 7 जुलाई ( पीटीआई ) - लातुर की एक अदालत ने जाली विकलांगता प्रमाण पत्र जमा करके और सरकार को धोखा देकर सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश करने के लिए दो लोगों को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है ।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एम. एन. चव्हाण ने 4 जुलाई को दो अभियुक्तों - श्रीराम ज्ञानेश्वर पाटिल और ज्ञानेश्वर वसंतराव डोडाटल्ले को दोषी ठहराया और उन दोनों पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया ।
शिवाजीनगर पुलिस ने पंचायत समिति के तत्कालीन खंड विकास अधिकारी की शिकायत के आधार पर 23 फरवरी 2008 को दोनों अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया था ।
जाँच के दौरान यह पाया गया कि अभियुक्तों ने अधिकारियों को गुमराह करने और ग्राम सेवकों के रूप में नियुक्ति प्राप्त करने के लिए अपने आवेदनों के साथ जाली विकलांगता प्रमाण पत्र जमा किए थे ।
इसके बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दायर किया ।
अदालत ने शिकायतकर्ता के दो जिला परिषद अधिकारियों - तत्कालीन सिविल सर्जन और जांच अधिकारी की गवाही पर भरोसा किया । साक्ष्य ने स्थापित किया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत विकलांगता प्रमाण पत्र कभी भी सिविल सर्जन के कार्यालय द्वारा जारी नहीं किए गए थे - निर्णायक रूप से यह साबित करते हुए कि दस्तावेज जाली थे - सोमवार को एक पुलिस विज्ञप्ति में कहा गया ।
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