ठाणे 15 जुलाई ( पीटीआई ) महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ( एमएसीटी ) ने एक 28 वर्षीय व्यक्ति के परिवार को 25.71 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसकी सात साल पहले एक तेज रफ्तार टैंकर की चपेट में आने से मौत हो गई थी ।
मंगलवार को अपने आदेश में न्यायाधिकरण ने मामले की ठीक से जांच करने में विफल रहने के लिए पुलिस की खिंचाई करते हुए कहा कि आपत्तिजनक वाहन के बोनट पर महाराष्ट्र सरकार लिखा था ।
आदेश के अनुसार ठाणे जिले के भिवंडी क्षेत्र में चाय की दुकान चलाने वाले गणेश धूला पाटिदार की 12 फरवरी 2019 को अस्पताल ले जाते समय एक तेज रफ्तार टैंकर की चपेट में आने से मृत्यु हो गई ।
बाद में उनके परिवार ने मुआवजे की मांग करते हुए दावा दायर किया ।
बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए तर्क दिया कि पाटिदार मानसिक रूप से अस्थिर था और उसने वाहन के सामने कदम रख कर आत्महत्या कर ली । हालांकि न्यायाधिकरण ने दावे को खारिज कर दिया ।
न्यायाधीश ने कहा कि यह दिखाने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं है कि मृतक तनाव में था और कथित तनाव में उसने आत्महत्या कर ली थी । एम. ए. सी. टी. सदस्य आर. वी. मोहिते ने पीड़ित के दुखी भाई से अस्पष्ट बयान दर्ज करने और प्राथमिकी दर्ज करने में विफल रहने के लिए स्थानीय भोईवाड़ा पुलिस की निंदा की ।
न्यायाधिकरण ने कहा कि जांच नहीं करने के लिए पुलिस के आचरण पर संदेह पैदा होता है क्योंकि दुर्घटना में शामिल टैंकर के बोनट पर लिखा गया था ।
न्यायाधिकरण ने टैंकर के मालिक और बीमाकर्ता को याचिका की तारीख से प्रति वर्ष 9 प्रतिशत ब्याज के साथ 25,71,900 रुपये के मुआवजे का भुगतान करने के लिए संयुक्त रूप से और अलग - अलग रूप से उत्तरदायी ठहराया ।
दावेदारों का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता पी. एम. टिल्लू ने किया जबकि टैंकर मालिक की ओर से अधिवक्ता एस. एस. भालेराव पेश हुए । बीमाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता के. पी. सौंदत्तिकर ने किया ।
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