नई दिल्ली 17 जुलाई ( पीटीआई ) उच्चतम न्यायालय केरल उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर 20 जुलाई को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें राज्य वक्फ बोर्ड को उसकी अनुमति के बिना कोई बड़ा निर्णय लेने से रोक दिया गया था ।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शुक्रवार को वक्फ बोर्ड के वकील की उस दलील पर ध्यान दिया, जिसमें मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई थी ।
शीर्ष अदालत सोमवार को मामले की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई ।
15 जुलाई को एक अंतरिम आदेश में केरल उच्च न्यायालय ने राज्य वक्फ बोर्ड को उसकी अनुमति के बिना कोई भी बड़ा निर्णय लेने से रोक दिया ।
मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इसने यह भी निर्देश दिया था कि बोर्ड अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई पूंजीगत व्यय नहीं करेगा या कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेगा ।
उच्च न्यायालय की पीठ ने सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया था कि संयुक्त वक्फ प्रबंधन सशक्तिकरण दक्षता और विकास अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बोर्ड में उसके प्रतिनिधि की नियुक्ति की जाए ।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि बोर्ड कुछ समय के लिए वक्फ मामलों से निपटने वाले राज्य सरकार के संयुक्त सचिव के प्रशासन के तहत कार्य करेगा ।
उच्च न्यायालय के निर्देश कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आए जिनमें से एक भाजपा नेता शोन जॉर्ज द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बोर्ड का कामकाज अवैध था क्योंकि इसमें अधिनियम द्वारा अनिवार्य दो गैर - मुस्लिम सदस्य नहीं थे ।
उच्च न्यायालय ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 22 जुलाई को सूचीबद्ध किया था ।
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