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चुनाव न्यायाधिकरण के पास जाली जाति प्रमाण पत्र घोषित करने का अधिकार क्षेत्र नहीं हैः इलाहाबाद उच्च न्यायालय

PTI2 min read
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प्रयागराज 7 जुलाई ( पीटीआई ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक चुनाव न्यायाधिकरण के पास जाली जाति प्रमाण पत्र को सत्यापित करने या घोषित करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है । इसलिए जाति प्रमाण पत्र की वास्तविकता को एक चुनाव याचिका में चुनौती या जांच नहीं दी जा सकती है । न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने राधा चरण की एक याचिका को खारिज करते हुए कहा, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में राम कोला विधानसभा ( अनुसूचित जाति निर्वाचन क्षेत्र के लिए आरक्षित ) से विनय प्रकाश गोंड की जीत को चुनौती दी थी । याचिकाकर्ता के अनुसार गोंड ओ. बी. सी. से संबंधित था और उसने अनुसूचित जाति उम्मीदवारों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए धोखाधड़ी से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त किया था । अदालत ने कुमारी माधुरी पाटिल बनाम अतिरिक्त आयुक्त 1994 के फैसले पर भरोसा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विशेष जांच समितियाँ सामाजिक स्थिति के दावों को निर्धारित करने के लिए तथ्य - खोज प्राधिकरण से लैस विशेष विशेषज्ञ मंच हैं । इसने नोट किया कि राज्य सरकार ने जाति प्रमाणपत्रों की वैधता की जांच करने के लिए एक पदानुक्रम में तीन अलग - अलग समितियों का गठन किया था और इन पैनलों के पास उन्हें मान्य या अमान्य करने का विशेष अधिकार है । अदालत ने 6 जुलाई को अपने फैसले में कहा, " इसलिए ऊपर बताए गए तथ्यों के साथ - साथ निर्णयों के आधार पर अब यह स्पष्ट है कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को न तो चुनौती दी जा सकती है और न ही चुनाव न्यायाधिकरण द्वारा चुनाव याचिका में इसकी जांच की जा सकती है ।

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