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एन. एच. आर. सी. ने मेरठ में प्रदर्शनकारियों पर'बिना उकसावे'के लाठीचार्ज को लेकर उत्तर प्रदेश के गृह सचिव डी. जी. पी. को नोटिस जारी किया

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एन. एच. आर. सी. ने मेरठ में प्रदर्शनकारियों पर'बिना उकसावे'के लाठीचार्ज को लेकर उत्तर प्रदेश के गृह सचिव डी. जी. पी. को नोटिस जारी किया

National Human Rights Commission {NHRC}

Editorial

नई दिल्ली 10 जुलाई ( पी. टी. आई. ) एन. एच. आर. सी. ने उत्तर प्रदेश के डी. जी. पी. और राज्य के गृह सचिव को एक शिकायत के मद्देनजर नोटिस जारी किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने मेरठ में एक शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान बिना उकसावे के क्रूर लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिससे कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर चोटें आईं । शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं । इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एन. एच. आर. सी. ) ने 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है । एन. एच. आर. सी. के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने 10 जुलाई की कार्यवाही के अनुसार मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया । शिकायतकर्ता भोपाल के सुनील अहिरवार ने आरोप लगाया कि " ललिता गौतम हत्या मामले में न्याय की मांग करते हुए मेरठ में एक शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बिना उकसावे के क्रूर लाठीचार्ज किया जिससे कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं । शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि व्यापक रूप से प्रसारित वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को रक्षाहीन व्यक्तियों को बेरहमी से पीटते हुए हिरासत में यातना देते हुए दिखाया गया है, जिन्हें पहले ही हिरासत में ले लिया गया था, जो कानून के शासन के पूर्ण टूटने और व्यक्तिगत गरिमा के संरचनात्मक उल्लंघन का प्रदर्शन करते हैं । शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज करने के लिए एन. एच. आर. सी. द्वारा तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और मांग की कि मुख्य सचिव और डी. जी. पी. एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करें - मामले की एक स्वतंत्र जांच शुरू करें और व्यक्तिगत जवाबदेही स्थापित करने के लिए वायरल वीडियो को सत्यापित करें - सभी घायलों को तत्काल चिकित्सा पुनर्वास और वैधानिक वित्तीय मुआवजा प्रदान करें और चूक करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ त्वरित आपराधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दें । रजिस्ट्री को उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और उसके डीजीपी को आयोग के अवलोकन के लिए 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है । कार्यवाही की एक प्रति मुख्य सचिव को भेजी जानी है ताकि मामले में आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके ।

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