**EDS: THIRD PARTY IMAGE; SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: NCP (SP) MP Supriya Sule speaks in the Lok Sabha during the second part of the Budget session of Parliament, in New Delhi, Friday, March 27, 2026. (Sansad TV via PTI Photo)(PTI03_27_2026_000046B)
Editorial
एन. सी. पी. ( एस. पी. ) की नेता सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी ने प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है ।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुले ने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है ।
सुले ने कहा कि वह पार्टी अध्यक्ष शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल सहित राकांपा ( सपा ) के शीर्ष नेतृत्व से परामर्श करने के बाद मामले को स्पष्ट कर रही हैं ताकि पार्टी और विपक्षी गुट महा विकास अघाड़ी ( एमवीए ) के कार्यकर्ताओं के बीच किसी भी गलतफहमी से बचा जा सके ।
राकांपा ( सपा ) नेता ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल, कांग्रेस नेता सतेज पाटिल और शिवसेना ( यूबीटी ) के सांसद संजय रावत से भी बात की है ।
सुले ने कहा कि पार्टी को परिसीमन अभ्यास के संबंध में केंद्र से कोई लिखित प्रस्ताव नहीं मिला है और इसलिए इस स्तर पर औपचारिक रुख नहीं ले सकती है । हालांकि उन्होंने कहा कि अगर ऐसा प्रस्ताव प्राप्त होता है तो पार्टी 24 घंटे के भीतर अपनी स्थिति की घोषणा करेगी ।
बारामती के सांसद ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि एनसीपी ( एसपी ) इस कानून का समर्थन करेगी, जो अनाम स्रोतों पर आधारित थी और जिससे भ्रम पैदा हुआ था ।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने हाल ही में दावा किया था कि भाजपा लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने और 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में परिसीमन शुरू करने के 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए उनका समर्थन प्राप्त करने के लिए राकांपा ( सपा ) और द्रमुक को लुभा रही है ।
इस मुद्दे पर पहले की चर्चाओं को याद करते हुए सुले ने कहा कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने परिसीमन पर विचार - विमर्श के लिए अपनी शिवसेना ( यूबीटी ) के सांसद अरविंद सावंत और एआईएमआईएम के लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी को आमंत्रित किया था । उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बैठक में उपस्थित थे ।
सुले ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने चिंता व्यक्त की थी कि विशुद्ध रूप से जनसंख्या के आधार पर परिसीमन उनके लिए अनुचित होगा और उन्होंने इस तरह के कदम का विरोध किया था । चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं ने एक वैकल्पिक सूत्र खोजने का सुझाव दिया ।
सुले के अनुसार रिजीजू ने तब कश्मीर से कन्याकुमारी तक सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव रखा था ।
उन्होंने कहा कि इस तरह के फार्मूले के तहत महाराष्ट्र की लोकसभा की संख्या 48 से बढ़कर 72 हो जाएगी । उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को विस्तारित संख्या पर लागू किया जाएगा ।
सुले ने कहा कि यदि प्रस्तावित कानून सभी राज्यों में सीटों में समान 50 प्रतिशत की वृद्धि पर आधारित होता है तो इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं होगा । उन्होंने हालांकि जोर देकर कहा कि इस तरह के प्रस्ताव का समर्थन करने का कोई भी निर्णय भारत गुट के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा ।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में केंद्र को पत्र लिखकर अलग - अलग दलों के साथ अलग - अलग विचार - विमर्श करने के बजाय प्रस्ताव पर सामूहिक चर्चा की मांग की थी ।
सुले ने आरोप लगाया कि जब सरकार बाद में प्रस्तावित कानून के साथ आगे बढ़ी तो मसौदे में 50 प्रतिशत की वृद्धि का कोई उल्लेख नहीं था । उन्होंने दावा किया कि अमित शाह ने इस तरह के प्रावधान को शामिल करने के लिए सदन की कार्यवाही को संक्षिप्त रूप से निलंबित करने का सुझाव दिया था, लेकिन प्रस्ताव कभी भी अमल में नहीं आया और विधेयक को उस रूप में सामने नहीं लाया गया ।
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