खरगोन ( 8 जुलाई ) मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में कथित रूप से 5,000 रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़े गए एक चिकित्सा अधिकारी को एक साथ दो अन्य जिलों में तैनात पाया गया है ।
प्रारंभिक पूछताछ से पता चला कि आरोपी डॉ. महेश चंद शर्मा न केवल शाहडोल में उफ़री प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ( पी. एच. सी. ) में बल्कि श्योपुर और खरगोन में भी एक अनुबंध चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे । उन्होंने कहा कि असामान्य एक साथ नियुक्ति ने उपस्थिति और वेतन भुगतान के बारे में सवाल उठाए हैं ।
3 जुलाई को रीवा के लोकायुक्त दल ने शर्मा को कथित तौर पर उफ़री केंद्र में 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था । बाद की जांच से पता चला कि वह 2021 से श्योपुर के सहस्रम पीएचसी में और फरवरी 2023 से खरगोन के सेगांव ब्लॉक में केली पीएचसी में भी तैनात था ।
खरगोन में अधिकारियों ने 8 जून को केली में एक प्रसव मामले के दौरान उनकी अनुपस्थिति सहित बार - बार अनुपस्थिति की पुष्टि की, जिसके कारण जिला मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई की सिफारिश की ।
मई में उनका वेतन रोक दिया गया था लेकिन बाद में नियमित उपस्थिति के दावों के बाद जून में जारी किया गया था । अधिकारियों ने कहा कि शाहदोल में अनियमित उपस्थिति के कारण उनका वेतन चार महीने से जारी नहीं किया गया है ।
शहडोल श्योपुर और खरगोन में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है ।
श्योपुर के सी. एम. ओ. डॉ. दिलीप सिंह सिकरवार ने कहा कि मामले को संदिग्ध मानते हुए श्योपुर में चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है और शाहडोल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक पत्र लिखा गया है जिसमें शर्मा की नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड के बारे में जानकारी मांगी गई है ।
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