महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक नीति बनाएगी कि राज्य के हर गांव में एक श्मशान तक पहुंच हो ।
राज्य विधानसभा में विपक्षी शिवसेना ( यू. बी. टी. ) के विधायक संजय डेरकर द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में गोरे ने कहा कि सरकार ने हर गांव के लिए एक श्मशान नीति अपनाई है और यह सुनिश्चित करेगी कि बिना दाह संस्कार की सुविधा वाले गांवों को भूमि और धन के आवंटन में प्राथमिकता मिले ।
मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र के 40,760 राजस्व गांवों में से 32,791 में श्मशान हैं ।
उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्देश दिया है कि उन गांवों में अन्य विकास कार्यों को मंजूरी देने से पहले एक श्मशान की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए जहां सुविधा नहीं है ।
गोर ने कहा कि उन गांवों के लिए एक अलग और व्यापक नीति तैयार की जा रही है जहां श्मशानों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है । सरकार आस - पास के गांवों के लिए सामान्य श्मशान बनाने और जहां भी आवश्यक हो वहां भूमि अधिग्रहण या खरीदने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है ।
उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टरों को उन गांवों की पहचान करने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा जाएगा जिनमें श्मशान की सुविधा नहीं है ।
मंत्री ने कहा कि श्मशान परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता जिला योजना समितियों - जिला परिषद उपकर कोष और अन्य उपलब्ध धन स्रोतों के माध्यम से प्रदान की जाएगी ।
उन्होंने कहा कि सरकार जहां भी आवश्यकता होगी, श्मशानों की स्थापना के लिए वन राजस्व और अन्य सरकारी विभागों से संबंधित भूमि की उपलब्धता पर ध्यान देगी ।
विधायक अतुल भोसले ( भाजपा ) विजय वडेट्टीवार ( कांग्रेस ) अमित देशमुख ( कांग्रेस ) और अन्य विधायकों ने भी चर्चा में भाग लिया ।
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