केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश के माध्यम से राज्य वक्फ बोर्ड को उसकी अनुमति के बिना कोई भी बड़ा निर्णय लेने से रोक दिया ।
मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम. की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि बोर्ड अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई पूंजीगत खर्च नहीं करेगा या कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेगा ।
पीठ ने सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि संयुक्त वक्फ प्रबंधन सशक्तिकरण दक्षता और विकास अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार बोर्ड में उसके प्रतिनिधि की नियुक्ति की जाए ।
अदालत ने कहा कि बोर्ड कुछ समय के लिए वक्फ मामलों से निपटने वाले राज्य सरकार के संयुक्त सचिव के प्रशासन के तहत कार्य करेगा ।
पीठ के निर्देश कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आए जिनमें से एक भाजपा नेता शोन जॉर्ज द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बोर्ड का कामकाज अवैध था क्योंकि इसमें अधिनियम द्वारा अनिवार्य दो गैर - मुस्लिम सदस्य नहीं थे ।
अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 22 जुलाई को सूचीबद्ध किया ।
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