शिमला 8 जुलाई ( पीटीआई ) स्थानीय किसान महिला स्वयं सहायता समूह ( एसएचजी ) के सदस्य ग्रामीण युवा और हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी में दुनिया के सबसे ऊंचे गाँव " कोमिक " की कृषि विस्तार एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने जैव उर्वरक और वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन पर छह दिवसीय प्रशिक्षण - सह - कार्यशाला में भाग लिया ।
हाल ही में आयोजित कार्यशाला का आयोजन जनजातीय विकास बोर्ड हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वित्त पोषित एक शोध परियोजना के तहत किया गया था, जिसका उद्देश्य नवीन जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में स्थायी कृषि और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना था ।
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में सतत आजीविका के लिए जैव अपशिष्ट के प्रबंधन के माध्यम से साइक्रोफिलिक रोगाणुओं और केंचुओं से जैव उर्वरक और वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन शीर्षक वाली शोध परियोजना पर कार्यशाला का नेतृत्व प्रधान अन्वेषक डॉ. नीलम कुमारी ने किया ।
परियोजना के मुख्य उद्देश्यों में से एक स्थानीय रूप से उपलब्ध कृषि और घरेलू जैव अपशिष्ट को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक उर्वरकों में बदलना था - रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता को कम करना - मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना और आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका के अतिरिक्त अवसर पैदा करना ।
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