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खुले मैनहोल पर हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाई, पूछा कि वह कार्रवाई करने से पहले मौतों का इंतजार क्यों करती है

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खुले मैनहोल पर हाईकोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाई, पूछा कि वह कार्रवाई करने से पहले मौतों का इंतजार क्यों करती है

Bombay High Court

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मुंबई 6 जुलाई ( पीटीआई ) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सोमवार को बृहन्मुंबई नगर निगम ( बीएमसी ) को खुले मैनहोल को सुरक्षित करने में विफलता के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि नागरिक निकाय निवारक कदम उठाने से पहले लगातार मौतों का इंतजार क्यों करता है । न्यायमूर्ति अजय गड़करी और न्यायमूर्ति कमल खाटा की पीठ ने बी. एम. सी. की प्रगति रिपोर्टों और हलफनामों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि खुले मैनहोल के मुद्दे पर की गई कार्रवाई बिना किसी लाभ के और केवल एक आंख धोने के लिए है । अदालत को 55 वर्षीय असलम शेख की मौत का निर्देश दिया गया था, जो शहर में भारी बारिश के बीच जुलाई में उपनगरीय सकीनाका में एक खुले मैनहोल में गिर गया था । बी. एम. सी. ने सोमवार को एक हलफनामे में अदालत को सूचित किया कि घटना के तुरंत बाद नगर निकाय प्रमुख ने एक बैठक की और उस क्षेत्र के प्रभारी चार अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया जहां त्रासदी हुई थी । घटना की जांच करने और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक समिति का भी गठन किया गया है - हलफनामे में कहा गया है कि पैनल यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय भी प्रदान करेगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो । बीएमसी के वकील अनिल सखरे ने अदालत को बताया कि आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि शहर में ऐसी कोई घटना नहीं होगी । अदालत ने हालांकि बी. एम. सी. को फटकार लगाते हुए कहा कि नागरिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों की जान जा रही है । अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की घटना के बाद आपने ( बीएमसी ) क्या किया है, यह महत्वपूर्ण नहीं है । इस तरह की अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए आप क्या करते हैं, यही मायने रखता है । जीवन बहुमूल्य है । मानव जीवन सर्वोपरि है । पीठ ने कहा कि शहर में मानसून की स्थिति एक सर्वविदित तथ्य है और इसलिए बी. एम. सी. को पहले से ही कदम उठाने चाहिए । अदालत ने पूछा कि मानसून के मौसम से पहले कदम क्यों नहीं उठाए जा सकते । क्या बी. एम. सी. किसी की जान जाने का इंतजार करती रहेगी और फिर कदम उठाने के लिए कूदती रहेगी । सखरे ने अदालत को सूचित किया कि शहर में सभी खुले मैनहोल 12 घंटे के भीतर बंद कर दिए जाएंगे और यदि मरम्मत कार्य के लिए कोई मैनहोल खोला जाता है तो उसके चारों ओर बैरिकेड्स लगाए जाएंगे । बी. एम. सी. के हलफनामे में यह भी बताया गया है कि 2 जुलाई को जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा । अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तारीख निर्धारित की ।

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