प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) ने शनिवार को कहा कि उसने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के खिलाफ धन शोधन की जांच के हिस्से के रूप में 1,021 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने का एक नया आदेश जारी किया है ।
एजेंसी ने एक बयान में कहा कि धन शोधन रोकथाम अधिनियम ( पी. एम. एल. ए. ) के तहत जारी अस्थायी आदेश में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के स्वामित्व वाले रिलायंस पावर के इक्विटी शेयर और सासान पावर और रिलायंस पावर से प्राप्त कुछ ऋण राशि कुर्क की गई है ।
यह जांच रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड ( आरएचएफएल ) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल ) के खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी से उपजी है ।
ईडी के अनुसार जांच में पाया गया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए 15,548 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन को रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित शेल ( डमी ) और समूह कंपनियों के एक जाल के माध्यम से व्यवस्थित रूप से डायवर्ट किया गया था ।
ईडी समूह के खिलाफ धन शोधन रोधी कानून के तहत दर्ज चार प्राथमिकियों और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम ( एफ. ई. एम. ए. ) के प्रावधानों के तहत तीन प्राथमिकियों के संबंध में कई मामलों की जांच कर रहा है ।
नवीनतम आदेश के साथ इस मामले में कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 20,367 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें ईडी ने अब तक चार आरोप पत्र दायर किए हैं और आठ लोगों को गिरफ्तार किया है ।
ईडी के अनुसार फेमा के तहत 77 करोड़ 86 लाख रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं ।
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