नई दिल्ली 3 जुलाई ( पीटीआई ) के उपाध्यक्ष सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि लोकतंत्र तब फलता - फूलता है जब प्रेस प्रश्नों को सूचित करता है और विश्वसनीयता और तथ्यों को बनाए रखते हुए बहस को बढ़ावा देता है ।
आर. एस. एस. के मुखपत्र ऑर्गेनाइज़र के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता वास्तव में तभी सार्थक होती है जब साहस और जिम्मेदारी के साथ इसका प्रयोग किया जाए ।
राधाकृष्णन ने ऑर्गेनाइज़र की 80 साल की यात्रा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सार्वजनिक विमर्श के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता है और राष्ट्रीय आयोजनों में इसकी ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला ।
उन्होंने स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र प्रेस के विकास में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में सेंसरशिप के खिलाफ इसकी 1949 की कानूनी चुनौती को नोट किया ।
उन्होंने आपातकाल के दौरान संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए रैली करने वाले बिंदु बनने के लिए ऑर्गेनाइज़र और उसके सहयोगी प्रकाशन द मदरलैंड की सराहना की ।
उपराष्ट्रपति ने चीन और पाकिस्तान के साथ युद्धों के दौरान जम्मू और कश्मीर की राष्ट्रीय सुरक्षा और राम जन्मभूमि आंदोलन सहित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों में आयोजक की सक्रिय भागीदारी पर प्रकाश डाला ।
इस कार्यक्रम में राधाकृष्णन ने दो पुस्तकों का भी विमोचन किया - " स्वतंत्रता के बाद हिंदुत्व प्रवचन " " संगठक पृष्ठों के साथ पढ़ना " " जो भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास के एक मूल्यवान अभिलेखीय रिकॉर्ड के रूप में कार्य करता है और " भारत से परे मंदिर " ।
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