नई दिल्ली 7 जुलाई ( पी. टी. आई. ) केंद्रीय सूचना आयोग ( सी. आई. सी. ) ने दिल्ली नगर निगम ( एम. सी. डी. ) को सलाह दी है कि वह सार्वजनिक डोमेन आवासीय लिफ्ट स्थापना योजनाओं - मानचित्र निर्माण अनुमोदन और संबंधित रिकॉर्ड - में सक्रिय रूप से यह देखते हुए रखे कि ऐसी जानकारी " बार - बार सार्वजनिक प्रासंगिकता " की है ।
सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने एक आवासीय अपार्टमेंट परिसर में लिफ्ट स्थापना से संबंधित रिकॉर्ड से संबंधित मामले में जानकारी प्रदान करने में देरी को लेकर एम. सी. डी. सार्वजनिक सूचना अधिकारी ( पी. आई. ओ. ) के खिलाफ कारण दर्शाएं कार्यवाही का निपटारा करते हुए कहा कि यह पारदर्शिता को बढ़ावा देने और व्यक्तिगत आर. टी. आई. आवेदनों की आवश्यकता को कम करने में मदद करेगा ।
आयोग ने नोट किया कि इस मामले में मांगी गई जानकारी आवासीय परिसरों में लिफ्ट की स्थापना से संबंधित अनुमतियों की योजनाओं और संबद्ध दस्तावेजों से संबंधित है, जो व्यापक जनहित और बार - बार सार्वजनिक प्रासंगिकता वाले मामले हैं ।
यह देखते हुए कि स्वीकृत भवन योजनाओं का पहले से ही नागरिक निकाय द्वारा सक्रिय रूप से खुलासा किया जा चुका है, आयोग ने कहा, " अब इमारतों में लिफ्टों की स्थापना से संबंधित जानकारी का भी सक्रिय रूप से प्रकटीकरण करना समझ में आता है, जिसमें रेट्रोफिटिंग / रेट्रो - इंस्टॉलेशन के माध्यम से प्रदान की गई जानकारी भी शामिल है । इसने तदनुसार एम. सी. डी. को सलाह दी कि वह आर. टी. आई. अधिनियम की धारा 4 की भावना के अनुपालन में लिफ्ट की स्थापना के लिए अनुमति या मंजूरी देने से संबंधित जानकारी और दस्तावेजों को सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय रूप से रखे ।
आयोग द्वारा देरी के लिए पी. आई. ओ. के स्पष्टीकरण को स्वीकार करने और आर. टी. आई. अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई के लिए कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा या जानबूझकर बाधा नहीं पाए जाने के बाद यह परामर्श आया ।
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